
बच्चा गणित से डरता है? जानिए इसका इलाज कैसे करें
आपका बच्चा गणित देखते ही रोने लगता है? जानिए डर के असली कारण और उन्हें दूर करने के आसान तरीके। एक मनोवैज्ञानिक की सलाह।
"मम्मी, आज गणित मत करवाओ ना!" - जब मेरी 7 साल की भतीजी आराध्या ये बोलकर रोने लगी, तो मैं हैरान रह गई। वो होशियार बच्ची है - हिंदी और अंग्रेज़ी में अच्छी है, चित्रकारी में भी माहिर है। लेकिन गणित की कॉपी खुलते ही उसकी आँखों में आँसू आ जाते। ये सिर्फ आराध्या की कहानी नहीं है। भारत में हर चौथा-पाँचवां बच्चा गणित से डरता है। अगर आपके घर में भी ऐसा होता है, तो घबराइए मत। पिछले 15 सालों से मैं ऐसे बच्चों के साथ काम कर रही हूँ और आज कुछ आसान तरीके बताऊँगी जो सच में काम करते हैं।
गणित का डर असल में है क्या?
सबसे पहले समझिए कि गणित में कमज़ोर होना और गणित से डरना - ये दो अलग बातें हैं। कमज़ोर बच्चा अभ्यास से सुधर सकता है, लेकिन डरा हुआ बच्चा पहले डर दूर करना होगा। ये एक असली मानसिक समस्या है।
ये लक्षण दिखें तो समझो डर है
- •गणित की क्लास से पहले पेट दर्द, सिर दर्द, हाथ कांपना
- •होमवर्क टालना, बहाने बनाना - 'आज तबियत ठीक नहीं'
- •खुद को कोसना - 'मुझसे नहीं होगा', 'मैं बेवकूफ हूँ'
- •परीक्षा में सब भूल जाना, भले ही घर पर आता था
- •गणित देखते ही रोना या गुस्सा करना
- •जितना जानता है, उससे कम नंबर आना
बच्चे को गणित का डर कहाँ से लगा?
मेरे अनुभव में ये सबसे बड़े कारण हैं:
1. बचपन की कोई शर्मिंदगी
बस एक बुरा अनुभव काफी है। कक्षा में गलत जवाब देना, टीचर की डाँट, दोस्तों का मज़ाक - ये सब बच्चे के मन में गहरा असर छोड़ते हैं।
एक लड़की ने बताया कि दूसरी क्लास में उसने 7+5=11 बोला था। टीचर ने सबके सामने बोला 'इतना भी नहीं आता?' उस दिन से वो गणित से डरने लगी। वो अब दसवीं में है और आज भी वो दिन याद है उसे।
2. माँ-बाप का खुद का डर
अगर आप बोलते हैं 'मुझे भी गणित नहीं आती थी' - तो बच्चे को लगता है ये तो खानदानी है। शोध बताते हैं कि अगर माँ-बाप को गणित का डर है, तो बच्चों में 40% ज़्यादा संभावना है कि वो भी डरेंगे।
3. जल्दी-जल्दी करो का दबाव
'जल्दी बोलो!', 'सबसे पहले हाथ उठाओ!' - ये सुनकर बच्चे घबरा जाते हैं। कुछ बच्चों को सोचने का समय चाहिए होता है। जब दबाव पड़ता है तो वो जम जाते हैं।
4. रट्टा मारना, समझना नहीं
पहाड़े रटवाना, सूत्र याद करवाना बिना समझाए - ये थोड़े दिन काम करता है। लेकिन जब सवाल घुमाकर आते हैं, बच्चा फेल हो जाता है। और फिर सोचता है 'मुझसे गणित नहीं होती'।
गणित का डर कैसे दूर करें?
धैर्य रखिए। ये डर एक दिन में नहीं लगा, एक दिन में जाएगा भी नहीं। तीन-छह महीने का समय दीजिए।
पहला कदम: डर को स्वीकारें
'कुछ नहीं होता, बस कर लो' - ये कहना आसान है, लेकिन इससे मदद नहीं मिलती। इसकी जगह कहिए:
- •'मुझे पता है गणित मुश्किल लग रही है तुम्हें'
- •'डरना ठीक है, लेकिन हम साथ मिलकर करेंगे'
- •'बताओ, कौन सी चीज़ सबसे मुश्किल लग रही है?'
दूसरा कदम: अपना डर मत बताइए
अगर आपको भी गणित से डर लगता था, तो बच्चे को यूँ मत बताइए। इसकी जगह कहिए - 'मुझे भी मेहनत करनी पड़ी थी गणित में, लेकिन अभ्यास से आ गई। तुम भी कर लोगे।'
तीसरा कदम: छोटी-छोटी जीत दिलाइए
अगर बच्चा पाँचवीं में है लेकिन तीसरी के सवाल भी नहीं कर पा रहा, तो तीसरी से शुरू करिए। शर्म मत दिलाइए, बस कहिए - 'चलो नींव मज़बूत करते हैं। मकान बनाने से पहले नींव तो चाहिए ना!'
- •आसान सवालों से शुरू करें जो बच्चा 90% सही करे
- •हर सही जवाब पर तारीफ करें
- •धीरे-धीरे कठिनाई बढ़ाएं
चौथा कदम: देखकर सीखने दीजिए
अंक तो दिखते नहीं हैं ना - 5 क्या है, 7 क्या है। इसीलिए चीज़ों से सिखाइए:
- •गिनती: लेगो, सिक्के, फल गिनना
- •जोड़-घटाव: चीज़ें रखना-हटाना
- •गुणा: 4×3 = 4 कतारों में 3-3 चीज़ें रखना
- •भिन्न: रोटी या पिज़्ज़ा काटना
- •सोरोबान (अबेकस): मोतियों से अंक देखना
सोरोबान (जापानी अबेकस) गणित के डर में बहुत कारगर है। क्योंकि अंक अब हवा में नहीं रहते - मोतियों की शक्ल में दिखते हैं। बच्चा अपनी आँखों से देखता है कि 5+3=8 कैसे होता है। SoroKid ऐप में यही तरीका खेल के रूप में आता है।
पाँचवाँ कदम: जल्दी का दबाव हटाइए
शुरू में समय की पाबंदी बिलकुल मत रखिए। बच्चा जितना समय ले, लेने दीजिए। जब वो सहज हो जाए, तब धीरे-धीरे समय सीमा लगाइए।
छठा कदम: गलती पर मारिए मत, सिखाइए
शोध बताते हैं कि गलतियों से दिमाग तेज़ होता है। बच्चे को सिखाइए:
- •'गलती मतलब तुम कोशिश कर रहे हो'
- •'चलो देखते हैं यहाँ क्या हुआ' (दोष मत दीजिए)
- •'अच्छा, अब पता चल गया क्या नहीं करना - यही तो सीखना है!'
सातवाँ कदम: रोज़मर्रा में गणित दिखाइए
बच्चा पूछता है 'गणित ज़िंदगी में कहाँ काम आती है?' दिखाइए:
- •बाज़ार: '100 का 20% छूट कितना हुआ?'
- •खाना बनाना: 'नुस्खा दोगुना करना है, सामान कितना?'
- •सफर: 'घर से स्कूल कितनी दूर? कितना समय?'
- •खेल: लूडो में गिनती, क्रिकेट में स्कोर
- •जेब खर्च: बचत का हिसाब रखना
माहिर से कब मिलें?
अगर दो-तीन महीने की लगातार कोशिश के बाद भी सुधार न हो, तो किसी विशेषज्ञ से मिलिए। हो सकता है:
- •गणित सीखने में कोई विशेष कठिनाई हो
- •सिर्फ गणित नहीं, हर चीज़ में घबराहट हो
- •ध्यान लगाने में दिक्कत हो
क्या करें, क्या न करें
| ✅ करें | ❌ न करें |
|---|---|
| धैर्य रखें | 'इतना आसान है, कैसे नहीं आता?' न बोलें |
| कोशिश की तारीफ करें | सिर्फ नंबरों पर ध्यान न दें |
| गलती से सिखाएं | गलती पर गुस्सा न करें |
| रोज़ थोड़ा-थोड़ा अभ्यास | छुट्टी वाले दिन घंटों पढ़ाना |
| मज़ेदार तरीके अपनाएं | सिर्फ बोरिंग अभ्यास |
| हौसला बढ़ाएं | 'तुमसे गणित नहीं होगी' न कहें |
आराध्या की कहानी का अंत
याद है मैंने आराध्या की बात की थी? उसके साथ हमने ये किया:
- •पहले-दूसरे महीने: पता लगाया कहाँ कमी है। दूसरी क्लास से शुरू किया। सोरोबान से पढ़ाया।
- •तीसरे-चौथे महीने: SoroKid ऐप पर रोज़ 15 मिनट खेलती थी। धीरे-धीरे हिम्मत बढ़ी।
- •पाँचवें-छठे महीने: अपनी कक्षा के सवाल शुरू किए। गलतियों का डर कम हुआ।
- •सातवें महीने से: क्लास में हाथ उठाने लगी। परीक्षा में 78 नंबर आए - पहले तो फेल होती थी।
आराध्या की मम्मी ने कहा - 'मुझे भरोसा नहीं था कि ये होगा। पहले वो गणित की कॉपी देखकर रोती थी। अब खुद सवाल हल करने की कोशिश करती है। SoroKid का खेल उसे बहुत पसंद है - वो इसे खेल बोलती है, पढ़ाई नहीं।'
गणित का डर खत्म करें। SoroKid में बच्चा अपनी गति से सीखता है - न कोई दबाव, न कोई डाँट। खेल जैसा मज़ा, असली गणित का हुनर।
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