
बच्चे की गणित में तारीफ कैसे करें (सही तरीका)
हर तारीफ मदद नहीं करती। यहाँ है शोध-आधारित प्रोत्साहन जो सच में गणित का आत्मविश्वास बढ़ाती है। 'तुम बहुत होशियार हो' कहना बंद करें - और जानें क्या कहें।
'वाह बेटा, तुम तो बहुत होशियार हो!' - ये कहना अच्छी तारीफ लगती है ना? लेकिन psychology research बताती है कि ये actually उल्टा effect कर सकती है। IIT toppers के parents interview में एक common बात थी - वो कभी 'smart' नहीं बोलते थे, 'मेहनती' बोलते थे। यहाँ है क्या कहना चाहिए और क्यों।
तारीफ पर शोध क्या कहता है
Dr. Carol Dweck के famous Stanford studies ने prove किया कि जिन बच्चों की 'होशियार' होने के लिए तारीफ होती है, वो actually time के साथ worse perform करते हैं उन बच्चों से जिनकी मेहनत की तारीफ होती है। क्यों? 'होशियार' एक fixed trait लगता है - या तो है, या नहीं है। 'मेहनती' changeable है।
जिन बच्चों को 'होशियार' कहा जाता है वो चुनौतियों से बचते हैं (कहीं साबित न हो जाए कि होशियार नहीं हैं)। जिन्हें मेहनत के लिए कहा जाता है वो चुनौतियाँ लेते हैं (मेहनत = सफलता)।
तारीफ जो मदद करती है
मेहनत की तारीफ करें
- •"तुमने इस पर बहुत मेहनत की।"
- •"देखो, तुमने कोशिश करना बंद नहीं किया मुश्किल होने पर भी।"
- •"तुम हार नहीं मानी!"
- •"देखो कितना अभ्यास किया तुमने।"
तरीके की तारीफ करें
- •"मुझे पसंद आया कि तुमने इसे छोटे भागों में बाँटा।"
- •"अच्छी सोच - अपना काम जाँचना।"
- •"वाह, तुमने एक अलग तरीके से हल किया!"
प्रगति की तारीफ करें
- •"तुम इनमें तेज़ हो रहे हो।"
- •"पिछले हफ्ते ये नहीं होता था, अब देखो!"
- •"तुम्हारी सटीकता बढ़ रही है।"
- •"इस महीने दो स्तर ऊपर गए तुम।"
तारीफ जो नुकसान करती है
| ये न कहें | क्यों उलटा पड़ता है | इसकी जगह कहें |
|---|---|---|
| "तुम बहुत होशियार हो!" | स्थिर सोच बनती है, असफलता से डर | "तुमने बहुत मेहनत की!" |
| "तुम स्वाभाविक रूप से अच्छे हो!" | लगता है मेहनत की जरूरत नहीं, अभ्यास कम होता है | "तुम्हारा अभ्यास काम कर रहा है!" |
| "ये तो तुम्हारे लिए आसान है!" | अगर बाद में कुछ कठिन हो, लगेगा कुछ गड़बड़ है | "तुम इसमें बेहतर हो रहे हो!" |
| "बिल्कुल सही! सब सही!" | पूर्ण होने का दबाव बनता है | "अच्छी मेहनत! चलो अभ्यास करते रहें।" |
| "तुम कक्षा में सबसे अच्छे हो!" | मूल्य को तुलना से जोड़ देता है | "तुम कितना सुधरे हो!" |
गलतियों पर क्या करें?
गलतियाँ सीखने के अवसर हैं, असफलताएं नहीं। आप गलतियों पर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं, ये बच्चे का चुनौतियों से रिश्ता तय करता है।
- •"गलतियाँ दिमाग को बढ़ाती हैं।"
- •"ओहो, ये मुश्किल था! चलो साथ में देखते हैं।"
- •"तुमने इससे कुछ सीखा। अब पता है!"
- •"गलत होना ठीक है - इससे ही सीखते हैं।"
जब बच्चा निराश हो
निराशा को कम न आँकें ('इतना मुश्किल नहीं है!')। स्वीकार करें और दिशा दें:
- •"अभी ये मुश्किल लग रहा है। ठीक है।"
- •"नई चीजों में निराश होना सामान्य है।"
- •"थोड़ा विराम लें और फिर आएं?"
- •"चलो थोड़ा आसान वाला करते हैं, फिर बढ़ते हैं।"
लंबी सोच
आप सिर्फ होमवर्क की तारीफ नहीं कर रहे। आप उनकी अंदरूनी सोच बना रहे हैं: 'मैं मुश्किल चीजें कर सकता/सकती हूँ। मेहनत से सुधार आता है। गलतियाँ ठीक हैं।' ये सोच जीवनभर रहती है।
व्यावहारिक उदाहरण: स्थितियाँ और जवाब
स्थिति: बच्चे ने मुश्किल सवाल हल कर लिया
- •❌ "वाह, तुम प्रतिभाशाली हो!"
- •✅ "वाह, देखो इसमें कितनी मेहनत लगी और तुमने हार नहीं मानी!"
स्थिति: बच्चा परीक्षा में 100% लाया
- •❌ "तुम बहुत होशियार हो, इसीलिए 100% आया!"
- •✅ "पूरे हफ्ते जो अभ्यास किया, वो काम आया। बहुत अच्छी मेहनत!"
स्थिति: बच्चे ने गलती की
- •❌ "इतना आसान था, गलत कैसे हुआ?"
- •✅ "हम्म, रोचक। चलो देखें क्या हुआ यहाँ। गलतियों से सीखते हैं।"
स्थिति: बच्चा कहता है 'मुझसे नहीं होता'
- •❌ "होता है, कोशिश करो बस!"
- •✅ "अभी तक नहीं होता। मुश्किल लग रहा है अभी। पर तुम सुधर रहे हो। देखें क्या मदद करे?"
'अभी तक' की शक्ति
एक सरल शब्द जो सोच बदल सकता है: 'अभी तक'।
- •"मुझसे भाग नहीं होता" → "मुझसे भाग अभी तक नहीं होता"
- •"मैं पहाड़े याद नहीं रख पाता" → "मैं पहाड़े अभी तक याद नहीं रख पाता"
- •"ये मुझसे नहीं होगा" → "ये मुझसे अभी तक नहीं हुआ"
'अभी तक' संकेत करता है कि ये वर्तमान स्थिति है, स्थायी पहचान नहीं। बच्चा समझता है कि क्षमता बढ़ती है।
रोज़ाना अभ्यास में कैसे लागू करें
- •होमवर्क के दौरान: मेहनत देखें ('देखा तुम कितने ध्यान से बैठे थे')
- •गलती पर: जिज्ञासु बनें, निराश नहीं ('रोचक, क्या हुआ यहाँ?')
- •सफलता पर: प्रक्रिया को श्रेय दें ('वो तरीका काम किया!')
- •संघर्ष पर: सामान्य बताएं ('मुश्किल लग रहा है, ये सामान्य है नई चीजों में')
- •तुलना करें: पुराने खुद से, दूसरों से नहीं ('पिछले महीने ये नहीं होता था!')
याद रखें: आप शब्दों से उनकी आत्म-बातचीत बना रहे हैं। आज जो आप कहते हैं, वो कल उनके दिमाग में खुद के बारे में बोलेंगे।
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